कुछ खोने का डर।

कांप सी गई है रूह किस कदर, ये कैसा मंजर हैं आया।अपनों से मिल ना सके, तमाम दूरियां और मायूसिया लाया।। बढ़ रहें है मौतो के सिलसिले, जाते वक़्त ना कोई उनको गले लगा पाया।बस छा रहा है घना अंधेरा, दिखती ना कोई रोशनी।दिखता है तो बस धुंधला साया।।