मैं अकेला।

इस अकेलेपन से इश्क़ हो गया।ना भूख़ लगती ना प्यास।।ना वक़्त का कुछ है पता।बस अब ये खामोशियां ही लगती है ख़ास।।

कुछ खोने का डर।

कांप सी गई है रूह किस कदर, ये कैसा मंजर हैं आया।अपनों से मिल ना सके, तमाम दूरियां और मायूसिया लाया।। बढ़ रहें है मौतो के सिलसिले, जाते वक़्त ना कोई उनको गले लगा पाया।बस छा रहा है घना अंधेरा, दिखती ना कोई रोशनी।दिखता है तो बस धुंधला साया।।

Road I chose

I was bleeding heavily and crossing the wavy ocean before I touched the land.Swampy was it and so things looked out of my hand. I dragged myself out of the boat and stood shakily on the beach.My eyes started searching the way  to escape the shore, there were high tides and they were about to … More Road I chose